केंद्र सरकार ने हाल में संसद को बताया कि पिछले 12 वित्तीय वर्षों में बैंकों ने बड़े कॉरपोरेट और सेवा प्रदाताओं को दिए गए लगभग 10 लाख करोड़ रुपये के ऋण माफ कर दिए हैं।
एक लिखित जवाब में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से बड़े उद्योगों और सेवाओं को दिए गए बकाया ऋणों के आंकड़े साझा किए और कहा कि यह वित्त वर्ष 2025 में 63,19,057 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 69,21,734 करोड़ रुपये हो गया है।आंकड़ों से पता चलता है कि 2018-19 में ऋण माफी की राशि 1,48,753 करोड़ रुपये के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
चौधरी ने आगे कहा कि वाणिज्यिक बैंकों के लिए जारी आरबीआई के तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान संबंधी दिशा-निर्देश 2025 के अनुसार, राइट-ऑफ (जिसका एक बड़ा हिस्सा तकनीकी/विवेकपूर्ण/वसूली के तहत अग्रिमों के कारण होता है) एक लेखांकन प्रक्रिया है जिसे बैंक अपनी बैलेंस शीट को समायोजित करने के लिए अपनाता है।
इससे पहले चौधरी ने पिछले साल दिसंबर में संसद को बताया था कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने पिछले साढ़े पांच वित्तीय वर्षों में, 30 सितंबर, 2025 तक, कुल 6.15 लाख करोड़ रुपये की ऋण राशि माफ कर दी है।
चौधरी ने कहा था, “भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों और चालू वित्तीय वर्ष में 30.9.2025 तक (अनंतिम आंकड़े) कुल 6,15,647 करोड़ रुपये के ऋण को बट्टे खाते में डाल दिया है।”
(जनचौक ब्यूरो)